बुधवार, 1 जून 2016
मंगलवार, 9 सितंबर 2014
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है तो...........
पाँच पाण्डव तथा सौ कौरवों के नाम ये थे :–
पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
1. युधिष्ठिर
2. भीम
3. अर्जुन
4. नकुल
5. सहदेव
( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )
******************************************
यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।
********************************************
वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -
1. दुर्योधन
2. दुःशासन
3. दुःसह
4. दुःशल
5. जलसंघ
6. सम
7. सह
8. विंद
9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष
11. सुबाहु
12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण
14. दुर्मुख
15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण
17. शल
18. सत्वान
19. सुलोचन
20. चित्र
21. उपचित्र
22. चित्राक्ष
23. चारुचित्र
24. शरासन
25. दुर्मद
26. दुर्विगाह
27. विवित्सु
28. विकटानन्द
29. ऊर्णनाभ
30. सुनाभ
31. नन्द
32. उपनन्द
33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा
35. सुवर्मा
36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु
38. महाबाहु
39. चित्रांग
40. चित्रकुण्डल
41. भीमवेग
42. भीमबल
43. बालाकि
44. बलवर्धन
45. उग्रायुध
46. सुषेण
47. कुण्डधर
48. महोदर
49. चित्रायुध
50. निषंगी
51. पाशी
52. वृन्दारक
53. दृढ़वर्मा
54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति
56. अनूदर
57. दढ़संघ
58. जरासंघ
59. सत्यसंघ
60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा
62. उग्रसेन
63. सेनानी
64. दुष्पराजय
65. अपराजित
66. कुण्डशायी
67. विशालाक्ष
68. दुराधर
69. दृढ़हस्त
70. सुहस्त
71. वातवेग
72. सुवर्च
73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी
75. नागदत्त
76. उग्रशायी
77. कवचि
78. क्रथन
79. कुण्डी
80. भीमविक्र
81. धनुर्धर
82. वीरबाहु
83. अलोलुप
84. अभय
85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय
87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी
89. विरवि
90. चित्रकुण्डल
91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि
93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान
95. दीर्घबाहु
96. सुजात
97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी
99. विरज
100. युयुत्सु
( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहन भी थी… जिसका नाम""दुशाला""था, जिसका विवाह"जयद्रथ"से हुआ था )
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"श्री मद्-भगवत गीता" के बारे में- किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
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कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
*************************************************
भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।
***************************************************
कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी
******************************************************
कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
******************************************************
कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में
******************************************************
क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
******************************************************
कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय
******************************************************
कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक
*******************************************************
गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।
*******************************************************
गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
********************************************************
अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को
********************************************************
गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में
*********************************************************
गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
**********************************************************
गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद
***********************************************************
गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
***********************************************************
गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.
************************************************************
अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है। 33 करोड नहीँ 33 कोटि देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ। कोटि = प्रकार।
*************************************************************
देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता। हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ: 12 प्रकार हैँ आदित्य: , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...!
8 प्रकार हैँ वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।
11 प्रकार हैँ- रुद्र: ,हर, बहुरुप,त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल: 12+8+11+2=33.
****************************************************************
अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं।
पाण्डव पाँच भाई थे जिनके नाम हैं -
1. युधिष्ठिर
2. भीम
3. अर्जुन
4. नकुल
5. सहदेव
( इन पांचों के अलावा , महाबली कर्ण भी कुंती के ही पुत्र थे , परन्तु उनकी गिनती पांडवों में नहीं की जाती है )
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यहाँ ध्यान रखें कि… पाण्डु के उपरोक्त पाँचों पुत्रों में से युधिष्ठिर, भीम और अर्जुन
की माता कुन्ती थीं ……तथा , नकुल और सहदेव की माता माद्री थी ।
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वहीँ …. धृतराष्ट्र और गांधारी के सौ पुत्र….. कौरव कहलाए जिनके नाम हैं -
1. दुर्योधन
2. दुःशासन
3. दुःसह
4. दुःशल
5. जलसंघ
6. सम
7. सह
8. विंद
9. अनुविंद
10. दुर्धर्ष
11. सुबाहु
12. दुषप्रधर्षण
13. दुर्मर्षण
14. दुर्मुख
15. दुष्कर्ण
16. विकर्ण
17. शल
18. सत्वान
19. सुलोचन
20. चित्र
21. उपचित्र
22. चित्राक्ष
23. चारुचित्र
24. शरासन
25. दुर्मद
26. दुर्विगाह
27. विवित्सु
28. विकटानन्द
29. ऊर्णनाभ
30. सुनाभ
31. नन्द
32. उपनन्द
33. चित्रबाण
34. चित्रवर्मा
35. सुवर्मा
36. दुर्विमोचन
37. अयोबाहु
38. महाबाहु
39. चित्रांग
40. चित्रकुण्डल
41. भीमवेग
42. भीमबल
43. बालाकि
44. बलवर्धन
45. उग्रायुध
46. सुषेण
47. कुण्डधर
48. महोदर
49. चित्रायुध
50. निषंगी
51. पाशी
52. वृन्दारक
53. दृढ़वर्मा
54. दृढ़क्षत्र
55. सोमकीर्ति
56. अनूदर
57. दढ़संघ
58. जरासंघ
59. सत्यसंघ
60. सद्सुवाक
61. उग्रश्रवा
62. उग्रसेन
63. सेनानी
64. दुष्पराजय
65. अपराजित
66. कुण्डशायी
67. विशालाक्ष
68. दुराधर
69. दृढ़हस्त
70. सुहस्त
71. वातवेग
72. सुवर्च
73. आदित्यकेतु
74. बह्वाशी
75. नागदत्त
76. उग्रशायी
77. कवचि
78. क्रथन
79. कुण्डी
80. भीमविक्र
81. धनुर्धर
82. वीरबाहु
83. अलोलुप
84. अभय
85. दृढ़कर्मा
86. दृढ़रथाश्रय
87. अनाधृष्य
88. कुण्डभेदी
89. विरवि
90. चित्रकुण्डल
91. प्रधम
92. अमाप्रमाथि
93. दीर्घरोमा
94. सुवीर्यवान
95. दीर्घबाहु
96. सुजात
97. कनकध्वज
98. कुण्डाशी
99. विरज
100. युयुत्सु
( इन 100 भाइयों के अलावा कौरवों की एक बहन भी थी… जिसका नाम""दुशाला""था, जिसका विवाह"जयद्रथ"से हुआ था )
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"श्री मद्-भगवत गीता" के बारे में- किसको किसने सुनाई?
उ.- श्रीकृष्ण ने अर्जुन को सुनाई।
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कब सुनाई?
उ.- आज से लगभग 7 हज़ार साल पहले सुनाई।
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भगवान ने किस दिन गीता सुनाई?
उ.- रविवार के दिन।
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कोनसी तिथि को?
उ.- एकादशी
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कहा सुनाई?
उ.- कुरुक्षेत्र की रणभूमि में।
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कितनी देर में सुनाई?
उ.- लगभग 45 मिनट में
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क्यू सुनाई?
उ.- कर्त्तव्य से भटके हुए अर्जुन को कर्त्तव्य सिखाने के लिए और आने वाली पीढियों को धर्म-ज्ञान सिखाने के लिए।
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कितने अध्याय है?
उ.- कुल 18 अध्याय
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कितने श्लोक है?
उ.- 700 श्लोक
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गीता में क्या-क्या बताया गया है?
उ.- ज्ञान-भक्ति-कर्म योग मार्गो की विस्तृत व्याख्या की गयी है, इन मार्गो पर चलने से व्यक्ति निश्चित ही परमपद का अधिकारी बन जाता है।
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गीता को अर्जुन के अलावा और किन किन लोगो ने सुना?
उ.- धृतराष्ट्र एवं संजय ने
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अर्जुन से पहले गीता का पावन ज्ञान किन्हें मिला था?
उ.- भगवान सूर्यदेव को
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गीता की गिनती किन धर्म-ग्रंथो में आती है?
उ.- उपनिषदों में
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गीता किस महाग्रंथ का भाग है....?
उ.- गीता महाभारत के एक अध्याय शांति-पर्व का एक हिस्सा है।
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गीता का दूसरा नाम क्या है?
उ.- गीतोपनिषद
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गीता का सार क्या है?
उ.- प्रभु श्रीकृष्ण की शरण लेना
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गीता में किसने कितने श्लोक कहे है?
उ.- श्रीकृष्ण ने- 574
अर्जुन ने- 85
धृतराष्ट्र ने- 1
संजय ने- 40.
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अधूरा ज्ञान खतरनाक होता है। 33 करोड नहीँ 33 कोटि देवी देवता हैँ हिँदू
धर्म मेँ। कोटि = प्रकार।
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देवभाषा संस्कृत में कोटि के दो अर्थ होते है, कोटि का मतलब प्रकार होता है और एक अर्थ करोड़ भी होता। हिन्दू धर्म का दुष्प्रचार करने के लिए ये बात उडाई गयी की हिन्दुओ के 33 करोड़ देवी देवता हैं और अब तो मुर्ख हिन्दू खुद ही गाते फिरते हैं की हमारे 33 करोड़ देवी देवता कुल 33 प्रकार के देवी देवता हैँ हिँदू धर्म मेँ: 12 प्रकार हैँ आदित्य: , धाता, मित, आर्यमा, शक्रा, वरुण, अँश, भाग, विवास्वान, पूष, सविता, तवास्था, और विष्णु...!
8 प्रकार हैँ वासु:, धर, ध्रुव, सोम, अह, अनिल, अनल, प्रत्युष और प्रभाष।
11 प्रकार हैँ- रुद्र: ,हर, बहुरुप,त्रयँबक, अपराजिता, बृषाकापि, शँभू, कपार्दी, रेवात, मृगव्याध, शर्वा, और कपाली।
एवँ दो प्रकार हैँ अश्विनी और कुमार।
कुल: 12+8+11+2=33.
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अगर कभी भगवान् के आगे हाथ जोड़ा है
तो इस जानकारी को अधिक से अधिक
लोगो तक पहुचाएं।
गुरुवार, 27 जून 2013
एक बार एक किसान की घड़ी कहीं खो गयी. वैसे
तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे
भावनात्मक रूप से
जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस
पाना चाहता था.
उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास
किया, कभी कमरे में
खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में
….पर तामाम
कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने
निश्चय
किया की वो इस काम में बच्चों की मदद
लेगा और उसने आवाज
लगाई , ” सुनो बच्चों , तुममे से जो कोई
भी मेरी खोई घडी खोज
देगा उसे मैं १०० रुपये इनाम में दूंगा.”
फिर क्या था , सभी बच्चे जोर-शोर दे इस काम
में लगा गए…वे
हर जगह की ख़ाक छानने लगे , ऊपर-नीचे ,
बाहर, आँगन में ..हर
जगह…पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली.
अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और
किसान
को भी यही लगा की घड़ी नहीं मिलेगी, तभी एक
लड़का उसके
पास आया और बोला , ” काका मुझे एक
मौका और दीजिये, पर
इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा.”
किसान का क्या जा रहा था, उसे तो घडी चाहिए
थी, उसने तुरंत
हाँ कर दी.
लड़का एक-एक कर के घर के कमरों मेंजाने
लगा…और जब वह
किसान के शयन कक्ष से निकला तो घड़ी उसके
हाथ में थी.
किसान घड़ी देख प्रसन्न हो गया औरअचरज से
पूछा ,” बेटा,
कहाँ थी ये घड़ी , और जहाँ हम सभी असफल
हो गए तुमने इसे
कैसे ढूंढ निकाला ?”
लड़का बोला,” काका मैंने कुछ नहीं किया बस मैं
कमरे में गया और
चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़पर ध्यान
केन्द्रित करने
लगा , कमरे में शांति होने के कारणमुझे
घड़ी की टिक-टिक सुनाई
दे गयी , जिससे मैंने
उसकी दिशा काअंदाजा लगा लिया और
आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.”
Friends, जिस तरह कमरे की शांति घड़ी ढूढने में
मददगार साबित
हुई उसी प्रकार मन की शांति हमें life
की ज़रूरी चीजें समझने में
मददगार होती है . हर दिन हमें अपनेलिए
थोडा वक़्त
निकालना चाहिए , जिसमे हम बिलकुल अकेले हों ,
जिसमे हम
शांति से बैठ कर खुद से बात कर सकें और अपने
भीतर
की आवाज़ को सुन सकें , तभी हम life को और
अच्छे ढंग से
जी पायेंगे...
तो घडी कीमती नहीं थी पर किसान उससे
भावनात्मक रूप से
जुड़ा हुआ था और किसी भी तरह उसे वापस
पाना चाहता था.
उसने खुद भी घडी खोजने का बहुत प्रयास
किया, कभी कमरे में
खोजता तो कभी बाड़े तो कभी अनाज के ढेर में
….पर तामाम
कोशिशों के बाद भी घड़ी नहीं मिली. उसने
निश्चय
किया की वो इस काम में बच्चों की मदद
लेगा और उसने आवाज
लगाई , ” सुनो बच्चों , तुममे से जो कोई
भी मेरी खोई घडी खोज
देगा उसे मैं १०० रुपये इनाम में दूंगा.”
फिर क्या था , सभी बच्चे जोर-शोर दे इस काम
में लगा गए…वे
हर जगह की ख़ाक छानने लगे , ऊपर-नीचे ,
बाहर, आँगन में ..हर
जगह…पर घंटो बीत जाने पर भी घडी नहीं मिली.
अब लगभग सभी बच्चे हार मान चुके थे और
किसान
को भी यही लगा की घड़ी नहीं मिलेगी, तभी एक
लड़का उसके
पास आया और बोला , ” काका मुझे एक
मौका और दीजिये, पर
इस बार मैं ये काम अकेले ही करना चाहूँगा.”
किसान का क्या जा रहा था, उसे तो घडी चाहिए
थी, उसने तुरंत
हाँ कर दी.
लड़का एक-एक कर के घर के कमरों मेंजाने
लगा…और जब वह
किसान के शयन कक्ष से निकला तो घड़ी उसके
हाथ में थी.
किसान घड़ी देख प्रसन्न हो गया औरअचरज से
पूछा ,” बेटा,
कहाँ थी ये घड़ी , और जहाँ हम सभी असफल
हो गए तुमने इसे
कैसे ढूंढ निकाला ?”
लड़का बोला,” काका मैंने कुछ नहीं किया बस मैं
कमरे में गया और
चुप-चाप बैठ गया, और घड़ी की आवाज़पर ध्यान
केन्द्रित करने
लगा , कमरे में शांति होने के कारणमुझे
घड़ी की टिक-टिक सुनाई
दे गयी , जिससे मैंने
उसकी दिशा काअंदाजा लगा लिया और
आलमारी के पीछे गिरी ये घड़ी खोज निकाली.”
Friends, जिस तरह कमरे की शांति घड़ी ढूढने में
मददगार साबित
हुई उसी प्रकार मन की शांति हमें life
की ज़रूरी चीजें समझने में
मददगार होती है . हर दिन हमें अपनेलिए
थोडा वक़्त
निकालना चाहिए , जिसमे हम बिलकुल अकेले हों ,
जिसमे हम
शांति से बैठ कर खुद से बात कर सकें और अपने
भीतर
की आवाज़ को सुन सकें , तभी हम life को और
अच्छे ढंग से
जी पायेंगे...
मंगलवार, 25 जून 2013
"सचमुच, सोने की चिड़िया "था" हमारा देश.....अब नहीं"
***********************************
बदन पर "रौशनी" ओढ़ी है सबने,
अंधेरा "रूह" तक फैला हुआ है...,
सुना है और इक भूखा भिखारी,
खुदा का नाम लेते "मर" गया है।।
***************************************
दोस्तो, केदारनाथ में महामारी का डर, सामूहिक अग्नि संस्कार की तैयारी, लकड़ी घी के इंतजाम के निर्देश, पुजारियों से मदद का आग्रह...................
केदारनाथ लूटपाट, बाबाओं से लाखों बरामद, बैंक से लूटे 83 लाख, 125 रूपये का एक पराठा, 120 रूपये में पीने का पानी.......
हृदय द्रवित करती हैं ऐसी खबरें.........सचमुच, सोने की चिड़िया "था" हमारा देश.....अब नहीं
(संतोष मिश्रा)
*********************************************
***********************************
बदन पर "रौशनी" ओढ़ी है सबने,
अंधेरा "रूह" तक फैला हुआ है...,
सुना है और इक भूखा भिखारी,
खुदा का नाम लेते "मर" गया है।।
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दोस्तो, केदारनाथ में महामारी का डर, सामूहिक अग्नि संस्कार की तैयारी, लकड़ी घी के इंतजाम के निर्देश, पुजारियों से मदद का आग्रह...................
केदारनाथ लूटपाट, बाबाओं से लाखों बरामद, बैंक से लूटे 83 लाख, 125 रूपये का एक पराठा, 120 रूपये में पीने का पानी.......
हृदय द्रवित करती हैं ऐसी खबरें.........सचमुच, सोने की चिड़िया "था" हमारा देश.....अब नहीं
(संतोष मिश्रा)
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रविवार, 16 जून 2013
बच्ची का था इलाज महंगा, गरीब माँ-बाप ने जान ले ली
****************************** ****
आज जब लोग फादर्स डे की बधाईयां देते "संडे" इंज्वाय कर रहे हैं.....अगरतला में एक दिहाड़ी मजदूर और उसकी पत्नी ने छः महीने की बच्ची के इलाज का महंगा खर्च न वहन कर पाने की वजह से उसकी हत्या कर शव घर के नजदीक एक नाले में फेंक दिये जाने की घटना ने मेरे जेहन को झिंझोड़ दिया है।
पुलिस ने बीमार बच्ची के पिता लाबा देबनाथ को गिरफ्तार कर लिया जिसने पत्नी के साथ मिल कर अपनी बेटी लीना की हत्या कर उसे घर के नजदीक एक नाले में फेंकने की बात कबूल कर ली।
बच्ची के पिता लाबा ने बताया कि लीना को टिटनस का संक्रमण होने से रक्तस्त्राव हो रहा था। चिकित्सकों ने प्रत्येक दिन 1500 रूपये की दवा और 900 का एक इंजेक्शन लगाए जाने की सलाह दी थी। घर के इकलौते कमाऊ व्यक्ति एवं दिहाड़ी मजदूर लाबा को पांच सदस्यीय परिवार चलाना पड़ता है और बच्ची के इलाज का खर्च जुटाना उसकी चादर से कहीं ज्यादा था, कैसे फैलाता वह पांव। परिवार ने गांव की पंचायत तथा स्थानीय प्रशासन से मदद की गुहार लगाई थी लेकिन कोई "मदद" नहीं मिली..।
मैं सोच रहा घोटालों के इस देश में जहां डा. मनमोहन सिंह ने स्मार्ट कार्ड जैसी कई योजनाएं चलाई हैं, सभी को दो जून की रोटी मिल सके इसके सभी प्रयास किये गये हैं मगर यह भी सच है कि प्रयास जमीनी नहीं "कागजी" ज्यादा हो गये हैं......!
ऐसी हृदय विदारक घटनाएं सचमुच देश के उन सभी जिम्मेदारों को "चुल्लु भर पानी देने" विवश करती हैं जो जिम्मेदारियां लिये हैं और केवल अपने घर भर रहे हैं......, ऐसी घटनाओं के बाद भी कैसे उतरता होगा अन्न इनके गले की हलक से नीचे......? सचमुच शर्म और नैतिकता मेरे देश से उसी तरह खत्म होती जा रही जैसे इसे मिला सोने की चिड़िया का "तमगा"..................(संतोष मिश्रा) - 16 जून 2013
रविवार, 7 अक्टूबर 2012
मन के नैन हजार.......: " स " से सावधान .................अजीब लग रहा हैं ...
मन के नैन हजार.......: " स " से सावधान .................
अजीब लग रहा हैं ...: " स " से सावधान ................. अजीब लग रहा हैं न ?पर ये सच्चाई है महिलाओं के लिये पहला " स " तो " सगाई " से ही शुरू हो जाता है उससे निज...
अजीब लग रहा हैं ...: " स " से सावधान ................. अजीब लग रहा हैं न ?पर ये सच्चाई है महिलाओं के लिये पहला " स " तो " सगाई " से ही शुरू हो जाता है उससे निज...
" स " से सावधान .................
अजीब लग रहा हैं न ?पर ये सच्चाई है महिलाओं के लिये पहला " स " तो " सगाई " से ही शुरू हो जाता है उससे निजात मिलती है तो " सास " सामने आ जाती है जो "साँस " तक लेने नही देती है उनसे बची तो "सार्स " यानि चीनी की बिमारी भी इनकी पक्की सहेली होती है ,श्रंगार प्रेमी होने के कारण " सोने " से भी डर, बच गये तो नये शत्रु यानी " सफर " "सड़क " और यहाँ तक की "सहेलियाँ "भी कम खतरा नही होती ,उनका "सनम " न ले उडें ,पर सबसे बड़ा खतरा तो "सजन " के रूप में आता है फिर" शरारत " " शराब " जिनसे बचने के लिये "सजना " संवरना " पड़ता है एक और खतरा इन्तजार में ही रहता है "सौत " के रूप में ,जिससे "सपने " में भी डर लगता है |ये सभी " स " एक " सदमे " का रूप ले लेते हैं |
तभी तो कहता हूँ महिलाएं पुरुषों से ज्यादा भावुक होती हैं " संकट " में फसे व्यक्तियों को "संकट " से छुटकारे के लिये "समझाने " लगती हैं यही समझाना ही उनके लिये "संकट " बन जाता है "सफाई " भी देनी पडती है सो अलग ,है न "स " खतरनाक क्रपया "स " से दूर ही रहे ,ये भी एक विडम्बना ही ही है मेरा नाम भी तो "स " से ही है .......................
अजीब लग रहा हैं न ?पर ये सच्चाई है महिलाओं के लिये पहला " स " तो " सगाई " से ही शुरू हो जाता है उससे निजात मिलती है तो " सास " सामने आ जाती है जो "साँस " तक लेने नही देती है उनसे बची तो "सार्स " यानि चीनी की बिमारी भी इनकी पक्की सहेली होती है ,श्रंगार प्रेमी होने के कारण " सोने " से भी डर, बच गये तो नये शत्रु यानी " सफर " "सड़क " और यहाँ तक की "सहेलियाँ "भी कम खतरा नही होती ,उनका "सनम " न ले उडें ,पर सबसे बड़ा खतरा तो "सजन " के रूप में आता है फिर" शरारत " " शराब " जिनसे बचने के लिये "सजना " संवरना " पड़ता है एक और खतरा इन्तजार में ही रहता है "सौत " के रूप में ,जिससे "सपने " में भी डर लगता है |ये सभी " स " एक " सदमे " का रूप ले लेते हैं |
तभी तो कहता हूँ महिलाएं पुरुषों से ज्यादा भावुक होती हैं " संकट " में फसे व्यक्तियों को "संकट " से छुटकारे के लिये "समझाने " लगती हैं यही समझाना ही उनके लिये "संकट " बन जाता है "सफाई " भी देनी पडती है सो अलग ,है न "स " खतरनाक क्रपया "स " से दूर ही रहे ,ये भी एक विडम्बना ही ही है मेरा नाम भी तो "स " से ही है .......................
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